राष्ट्र निर्माण और हिंदी साहित्य: 2047 के विकसित भारत हेतु एक वैचारिक विश्लेषण – Research Front

राष्ट्र निर्माण और हिंदी साहित्य: 2047 के विकसित भारत हेतु एक वैचारिक विश्लेषण

Publication Date : 10-03-2026

DOI: 10.5281/zenodo.19689607


Author(s) :

डॉ. मीना ठाकुर.


Volume/Issue :
Volume 14
,
Issue 1
(03 - 2026)



Abstract :

भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और बौद्धिक विकास भी शामिल है। राष्ट्र के समग्र विकास में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि साहित्य समाज की चेतना, मूल्यों और विचारधाराओं को दिशा प्रदान करता है। हिंदी साहित्य भारतीय समाज की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के संदर्भ में हिंदी साहित्य की भूमिका का विश्लेषण करना है। हिंदी साहित्य सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण, राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक चेतना को सुदृढ़ करने का कार्य करता है। साहित्य समाज में सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा के प्रसार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का माध्यम बनता है।


No. of Downloads :

3